ब्रिटिश कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका इन दिनों खूब चर्चा में है । एक स्टिंग ऑपरेशन के माध्यम से कंपनी पर आरोप है कि उसने करीब 5 करोड़ फे
सच कहूं
लोकसत्य ( दिल्ली)
इसमें कोई दो राय नहीं कि तकनीक किसी भी देश के सामाजिक , आर्थिक व राजनीतिक क्षेत्र में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अनेक फायदे पहुंचाने व कार्य संस्कृति में नयापन लाने का मादा ( ताकत ) रखती है । लेकिन हाल ही में जिस तरह फेसबुक उपयोगकर्ताओं का डाटा चोरी कर अमेरिकी चुनाव में दुरुपयोग का मामला सामने आया है , वह दर्शाता है कि डेटा लीक समेत तमाम साइबर अपराध न सिर्फ विकासशील देशों के लिए बल्कि विकसित देशों के लिए भी समान रूप से एक गंभीर चुनौती है ।
भारत के संदर्भ और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में इसके महत्व को समझे तो मोबाइल बैंकिंग , मोबाइल गेटवे , व सॉफ्ट करेंसी के माध्यम से तीव्र लेनदेन संभव हुआ है । इसके अतिरिक्त आउटसोर्सिंग क्षेत्र में रोजगार के नए विकल्प भी खुले हैं । यह डिजिटलीकरण का ही कमाल है कि शिक्षा के क्षेत्र में ई- लर्निंग जैसी आभासी कक्षाओं व स्वास्थ्य के क्षेत्र मे मोबाइल क्लीनिक जैसी नवीनतम विकल्पों का विकास संभव हुआ ।
. जिस प्रकार सिक्के के दो पहलू होते हैं । उसी प्रकार इसके भी दो पहलू हैं । एक तरफ जहां तकनीक का उज्जवल पक्ष है , तो दूसरी तरफ अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ( एनसीआरबी ) ताजा आंकड़े भयावह तस्वीर प्रस्तुत करते हैं । आंकड़ों के अनुमान मुताबिक भारत में पिछले 10 वर्षों में साइबर अपराधों में 19 गुना वृद्धि हुई है । जो न सिर्फ हमारे निजी जानकारियों के लिए होने की आशंका को बढ़ाते हैं बल्कि युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करने में आतंकवादियों का काम भी आसान कर रही है । हालांकि कहना कठिन है कि भारत में भी चुनाव संबंधी डाटा का दुरुपयोग हुआ है लेकिन सहयोगी कंपनी ने यह स्वीकार करके संदेह बढ़ा दिया है कि उसने यहां के कई दलों को अपनी सेवाएं दी हैं , जो विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र देश भारत के लिए नया खतरा साबित हो सकता है ।
कुल मिलाकर कहें तो एक तरफ जहां इंटरनेट ने हमारी जिंदगी को सरल बनाने व समय बचाने का काम किया है तो दूसरी ओर डिजिटल साधनों के दुरुपयोग संबंधी ' साइबर अपराध ' नामक नवीन समस्या को जन्म दिया है ।
. साइबर अपराधों में लगातार होती वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि कठोर दंड का प्रावधान करने वाले सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 व 2013 में पारित राष्ट्रीय सुरक्षा नीति जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय अति संवेदनशील सूचना और अवसंरचना संरक्षण केंद्र की स्थापना की गई जैसे प्रयास सराहनीय तो हैं किंतु इन्हें पर्याप्त नहीं कहा जा सकता ।
यह ठीक है कि सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक को चेताते हुए कहा कि सोशल साइट्स के ग्राहकों के हितों की रक्षा को लेकर जो नियम कानून है उसकी नए सिरे से समीक्षा की जाएगी , लेकिन उन्हें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सोशल मीडिया साइट्स भारत में भारतीय कानून के हिसाब से ही चलें ।
जनसत्ता
. इसके अतिरिक्त व्यक्तिगत व सांगठनिक स्तर पर भी कदम उठाना वर्तमान समय की सख्त आवश्यकता है । साइबर सुरक्षा के खतरे को कम करने के लिए हमारी प्राथमिक कोशिश इस बात पर होनी चाहिए कि किस तरीके से लोगों में सजगता का विकास हो ? इसके लिए साइबर सुरक्षा संबंधी विषय वस्तु को पाठ्यक्रम में शामिल करना व विभिन्न प्रकार के संगठनों व गैर सरकारी संगठन , सिविल सोसाइटी के माध्यम से जन जागरूकता सैलाना एक बेहतर विकल्प हो सकता है । जन जागरूकता इसलिए भी आवश्यक है ताकि लोग अपने निजी अधिकारों को जाने और उनका दावा कर सकें । व्यक्तिगत स्तर पर एंटीवायरस , मालवेयर का प्रयोग भी अति आवश्यक है लेकिन इसे समय-समय पर अपडेट तंत्र की जिम्मेदारी है । वर्तमान में हम गुगल जैसे अमेरिकी सर्च इंजन पर निर्भर है , ऐसे में हमारा प्रयास यह भी होना चाहिए कि हम अपना स्वदेशी सर्च इंजन विकसित करें ।
उपर्युक्त सुनियोजित उपायों व मजबूत रणनीति के माध्यम से न सिर्फ संविधान प्रदत्त निजता के अधिकार को सुनिश्चित किया जा सकेगा बल्कि देश की एकता व अखंडता को ठेस पहुंचाने वाले तत्वों व संबंधित संभावित खतरों से भी निजात पाई जा सकती है |
By - Vinod Rathee



